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OSHA MANDWA PPT BY SHUBHAM SINGH RAJPUT ANTHROPOLOGIST

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OSHA MANDWA PPT BY SHUBHAM SINGH RAJPUT ANTHROPOLOGIST

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It's the great culture of Bhunjiya Tribes of Chhattisgarh.
Bhunjiya Tribe is Chhattisgarh's Pvtgs.
I am conducting a research paper on this tribal group and my research is qualitative I am present this ppt in tribal literature festival in Raipur, c.g.
Shubham Singh Rajput
Shubham Singh Rajput Anthropologist

It's the great culture of Bhunjiya Tribes of Chhattisgarh.
Bhunjiya Tribe is Chhattisgarh's Pvtgs.
I am conducting a research paper on this tribal group and my research is qualitative I am present this ppt in tribal literature festival in Raipur, c.g.
Shubham Singh Rajput
Shubham Singh Rajput Anthropologist

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  1. 1. छत्तीसगढ़ क े भुजिया िनिाजि का अनुष्ठाजनक ज्योजिष क ें द्र: ओशा मड़वा प्रस्तुतकतता शुभम जसिंह एम.एस.सी चिुर्थ सेमेस्टर मानवजवज्ञान अध्ययनशाला पिं. रजवशिंकर शुक्ल जवश्वजवद्यालय, रायपुर ( छ०ग०)
  2. 2. विषय परिचय  भुजिया िनिाजि  अनुष्ठाजनक क ें द्र  ओशा मड़वा  वाजचक परिंपरा
  3. 3. क्षेत्र परिचय  छत्तीसगढ़ कत परिचय  गरियतबंद कत परिचय  ग्रतम परिचय (मौहत भतटत)
  4. 4. जनदशथन उद्देश्य पूर्थ जनदशथन छिीसगढ़ राज्य गररयाबिंद जिला गररयाबिंद जवकासखिंड मौहाभाटा शोध प्रविवध िथ्य सिंकलन प्रार्जमक िथ्य सिंकलन अध्ययन सतमतग्री एिं प्रविवधयत तथ्य विश्लेषण एम एस वडथ अध्ययन क्षेत्र का चयन अध्ययन समूह का चयन भुिंजिया िनिाजि अध्ययन की प्रक ृ जि वर्थनात्मक साक्षात्कार जनदेजशका असहभागी अवलोकन समूह वािाथ आजडयोिं-जविुवल ररकाजडिंग छायाजचत्र
  5. 5. भुजिया िनिाजि चौखुजटया जचिंदा खोलारजसया आमारुखीया पोजटयाहा
  6. 6. अध्ययन क े उद्येश्य  अभौजिक सिंस्क ृ जि का अध्ययन  अभौजिक सिंस्क ृ जि में पररविथन का अध्ययन  सािंस्क ृ जिक जवरासिो का सरक्षर् एविं पुनजनथमाथर्  अभौजिक सिंस्क ृ जि का सामाजिक, सािंस्क ृ जिक एविं धाजमथक महत्व प्रस्तुि करना
  7. 7. अध्ययन कत महत्व  भुिंजिया िनिाजि की अभौजिक सिंस्क ृ जि को समझने मे सहायक  िनिाजि पर, सिंस्क ृ जिकरर् क े प्रभाव का अध्ययन  लूप्त होिी सिंस्क ृ जि का दस्तावेिी करर्
  8. 8. ओशा मड़वा- बनावट धौरा लकड़ी ििंगली घास(खदर) उपासना पद्धजि प्रार्थना साधना कमथकािंड
  9. 9. विशेषतत: भजवष्यवार्ी क ें द्र • मौसम की सटीक भजवष्यवार्ी • जववाह सिंबिंधी भजवष्यवार्ी • अन्य भजवष्यवार्ी अनुष्ठाजनक क ें द्र
  10. 10. वनष्कषा  वाजचक परिंपरा होने क े कारर् उपयोग और उनक े स्वरूप में पररविथन आिे िा रहे हैं।  आधुजनकिा क े सिंपक थ में आने क े कारर् मूल अस्तस्तत्व को नुकसान पहुच रहा है।
  11. 11. सुझति  इस प्रकार क े अध्ययन से हम जवजभन्न अभौजिक सिंस्क ृ जि का साजहत्यकरर् कर सिंरक्षर् कर सकिे हैं।  वाजचक परिंपरा को लेखन मे बदलने हेिु प्रयत्न जकया िाना चाजहए।  इस अध्ययन और सिंरक्षर् क े आधार पर आने वाली पीढ़ी को इसक े बारे में ज्ञान जदया िा सकिा है और उसका पुनजनथमाथर् भी जकया िा सकिा है।  भुिंजिया िनिाजि मे ओशा मड़वा परिंपरागि सिंस्क ृ जि का जहस्सा है, इसको सुरजक्षि करक े रखना चाजहए िाजक विथमान में आने वाली पीढ़ी अपनी सिंस्क ृ जि से अवगि हो सक े ।

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