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Shirdi Shri Sai Baba Ji - Real Story 013

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साईं बाबा की जय-जयकार - http://spiritualworld.co.in
दामोदर को सांप के काटने और साईं बाबा द्वारा बिना किसी मंत्र-तंत्र अथवा दवा-दारू के उसके शरीर से जहर का बूंद-बूंद करके टपक जाना, सारे गांव में इसी की ही सब जगह पर चर्चा हो रही थी|
गांव के कुछ नवयुवकों ने द्वारिकामाई मस्जिद में आकर साईं बाबा के अपने कंधों पर बैठा लिया और उनकी जय-जयकार करने लगे| सभी छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष साईं बाबा की जय-जयकार के नारे पूरे जोर-शोर से लगा रहे थे|
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Shirdi Shri Sai Baba Ji - Real Story 013

  1. 1. दामोदर को सांप के काटने और साई बाबा द्वारा िबना िकसी मंत-तंत अथवा दवा-दार के उसके शरीर से जहर का बूंद-बूंद करके टपक जाना, सारे गांव मे इसी की ही सब जगह पर चर्चर्ार हो रही थी| गांव के कुछ नवयुवको ने द्वािरकामाई मिस्जद मे आकर साई बाबा के अपने कंधो पर बैठा िलिया और उनकी जय-जयकार करने लिगे| सभी छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष साई बाबा की जय-जयकार के नारे पूरे जोर-शोर से लिगा रहे थे| "हम तो साई बाबा को इसी तरह से सारे गांव मे घुमायेगे|" नयी मिस्जद के मौलिवी ने कहा - "मैंने तो पहलिे ही कह िदया था िक यह कोई साधारण पुरुष नही हैं| यह इंसान नही फरिरश्ते हैं| यह तो िशरडी का अहोभाग्य है िक जो यह यहां पर आ गए हैं|" 1 of 15 Contd…
  2. 2. "हां, हां, हम साई बाबा का जुलिूस िनकालिेगे|" अभी उपिस्थत विक एक स्वर मे बोलिे| िफरर उसके बाद सब जुलिूस िनकालिने की तैयारी करने मे लिग गये| यह सब देख-सुनकर पंिडतजी को बहत जयादा दुःख हआ| पूरे गांव मे केवलि वे ही एक ऐसे विक थे जो नये मंिदर के पुजारी के साथ-साथ पुरोिहताई और वैद का भी कायर िकया करते थे| यह बात उनकी समझ मे जरा- सी भी नही आयी िक साई बाबा के हाथ फरे रने से ही जहर कैसे उतर सकता है? 2 of 15 Contd…
  3. 3. इस बात को वह ढोग मान रहे थे| इसमे उनको साई बाबा की कुछ चर्ालि नजर आ रही थी| वह गांव के लिोगो का इलिाज भी िकया करते थे| साई बाबा के प्रतित उनके मन मे ईष्यार पैदा हो गयी थी| साई बाबा एक चर्मत्कारी पुरुष हैं, पंिडतजी इस बात को मानने के िलिए िबल्कुलि भी तैयार न थे| वह ईष्यार मे भरकर साई बाबा के िवरुद उल्टी-सीधी बाते बोलिने लिगे| सब जगह केवलि साई बाबा की ही चर्चर्ार थी| पर, पंिडतजी की ईष्यार का कोई िठकाना न था| "जरर कोई महात्मा हैं|“ "िसदपुरुष हैं|" 3 of 15 Contd…
  4. 4. "देखो न ! कैसे-कैसे चमतकार करता है !“ अब आस-पास के लोग िजनहोने साई बाबा के चमतकार के बारे मे सुना, उनके दशरन करने के िलए आ रहे थे| उधर पंिडतजी न नाग के जहर को शरीर से बूंद-बूंद कर टपक जाने की बात सुनी तो आगबबूला हो गये-और गांव के चौपाल पर बैठे लोगो से बोले- 4 of 15 Contd…
  5. 5. "यह गांव ही मूखो से भरा पडा है|" पंिडत ने कोध से कांपते हए कहा - "वह कल का मामूली छोकरा भला िसदपुरष कैसे हो सकता है ? कई-कई जनम बीत जाते है साधना करते हए, तब कही जाकर िसिद पाप होती है| नाग का जहर तो संपेरे भी उतार देते है| मुझे तो पहले ही िदन पता चल गया था िक वह कोई संपेरा है| एक संपेरो की ही ऐसी कौम होती है, िजनका कोई दीन-धमर नही होता| वह भला िसदपुरष कैसे हो सकता है?" 5 of 15 Contd…
  6. 6. "आप िबलकुल ठीक कहते है पंिडतजी!"-एक विक ने कहा - "पनदह-सोलह वषर का छोकरा है और गांव वालो ने उसका नाम रख िदया है 'साई बाबा'| यह साई बाबा का कया अथर होता है, पंिडतजी ! जरा हमे भी समझाइये?“ "इसका अथर तो तुम उनही लोगो से जाकर पूछो, िजनहोने उसका यह नाम रखा है|" पंिडतजी ने ईषयार मे भरकर कहा| िफर रहसयपूणर सवर मे बोले-"जाओ, पुरानी मिसजद मे देखकर आओ, वहां पर कया हो रहा है?" 6 of 15 Contd…
  7. 7. तभी अचानक झांझ, मदृंग, ढोल और अनय वाद्यो की आवाज तथा लोगो का कोलाहल सुनकर पंिडतजी चौंक गये| बाजो की आवाज के साथ-साथ जय-जयकार के नारे भी सुनायी दे रहे थे| उनहोने देखा, सामने से एक जुलूस आ रहा था| "पंिडतजी! बाहर आइए|साई बाबा की शोभायात्रा आ रही है|" एक विक ने बडे जोर से िचललाकर कहा| पंिडतजी उस नजारे को देखकर बडे हैरान थे| पालकी के आगे-आगे कुछ गांववासी झांझ, मंजीरे और ढोल बजाते हए चल रहे थे| उनके पीछे एक पालकी मे साई बाबा बैठे थे| दामोदर और उसके सािथयो ने पालकी अपने कंधो पर उठा रखी थी| उनके साथ गांव के पटेल भी थे और नई मिसजद के इमाम भी| 7 of 15 Contd…
  8. 8. साथ ही प्रतितिष्ठिष्ठितिष्ठ लोगो की भीड भी चल रही थी| इन सबके साथ गांव की बहुतिष्ठ सारी महिहलाएं भी थी| ऐसा लगतिष्ठा था िक जैसे सारा गांव ही उमहड पडा हो| सभी साई बाबा की जय-जयकार कर रहे थे| साई बाबा का ऐसा स्वागतिष्ठ-सत्कार देखकर पंिडितिष्ठजी के होश उड गये, महारे क्रोध के बुरा हाल हो गया| वह गला फाडकर िचल्लाकर बोले-"सत्यानाश! ये ब्राह्मण के लडके इस संपेरे के बहकावे महे आ गए है| यह बहुतिष्ठ बडा जादूगर है| नौजवानो को इसने अपने वश महे कर रखा है| यह बहुतिष्ठ बडा जादूगर है| नौजवानो को इसने अपने वश महे कर रखा है| देख लेना, एक िदन यह सब भी इसी की तिष्ठरह शैतिष्ठान बन जायेगे| हे भगवान! क्या महेरे भाग्य महे यह िदन भी देखना बाकी था?" 8 of 15 Contd…
  9. 9. जैसे-जैसे शोभायात्रा आगे बढ़तिष्ठी जा रही थी और उसमहे शािमहल होने वाले लोगो की भीड भी बढ़तिष्ठी जा रही रही, साई बाबा िक पालकी के आगे-आगे नवयुवक नाचतिष्ठे, गातिष्ठे और जय-जयकार से वातिष्ठावरण को गूंजा रहे थे| अपने-अपने घरो के दरवाजो पर खडी िस्त्रियां फू ल बरसाकर शोभायात्रा का स्वागतिष्ठ कर रही थी| पंिडितिष्ठजी से साई बाबा का यह स्वागतिष्ठ देखा न गया| वह गुस्से महे पैर पटकतिष्ठे हुए घर के अंदर चले गए और दरवाजा बंद करके, कमहरे महै जाकर पलंग पर लेट गए और महन-ही-महन साई बाबा को कोसने लगे| कैसा जमहाना आ गया है, इस कल के छोकरे ने तिष्ठो सारे गांव को िबगाडकर रख िदया है| पंिडितिष्ठजी को साई बाबा अपना सबसे बडा दुश्महन िदखाई दे रहे थे| जुलूस गांवभर महे घूमहतिष्ठा रहा और हर जबान पर साई बाबा की चचार होतिष्ठी रही| 9 of 15 Contd…
  10. 10. शोभायात्रा घूमहकर वापस लौट आयी|साई बाबा के पास कुछ ही व्यक्तिक रह गए| वह चुपचाप आँखे बंद िकये बैठे थे| "बाबा, जब आप पहले-पहल गांव महे आए थे और लोगो ने आपसे पूछा था िक आप कौन है, तिष्ठो आपने कहा था, महै साई बाबा हूं| साई बाबा का क्या अथर होतिष्ठा है?" दामहोलकर ने पूछा| उसके इस प्रतश पर साई बाबा महुस्करा िदए| "देखो, दो अक्षर का शब्द है-सा और ई| सा का अथर है देवी और ई का अथर होतिष्ठा है महां| बाबा का अथर होतिष्ठा है िपतिष्ठा| इस प्रतकार साई बाबा का अथर हुआ-देवी,महातिष्ठा और िपतिष्ठा|" 10 of 15 Contd…
  11. 11. "जनमह देने वाले महातिष्ठा-िपतिष्ठा के प्रतेमह महे स्वाथर की भावना िनिहतिष्ठ होतिष्ठी है| जबिक देवी महातिष्ठा-िपतिष्ठा के सेह महे जरा-सा भी स्वाथर नही होतिष्ठा है| वह तिष्ठुमहारा महागरदशरन करतिष्ठे है और तिष्ठुमहे प्रतेरणा देतिष्ठे है| आत्महदशरन, आत्महजान की सीधी और सची राह िदखातिष्ठे है|" साई बाबा ने समहझातिष्ठे हुए कहा - "वैसे साई बाबा को प्रतयोग परमहिपतिष्ठा परमहात्महा, ईशर, अल्लातिष्ठाला और महािलक के िलए भी िकया जातिष्ठा है|" 11 of 15 Contd…
  12. 12. "आप वासतव मे ही साई बाबा है|" सभी उपिसथत लोगो ने एक सवर मे कहा - "आपने हम सभी को सही रासता िदखाया है| सबको आपने ईशर की भिक के मागर पर लगाया है|“ "यह मनुषय शरीर न जाने िकतने िपछले जनमो के पुणय कमो को करने के पशात् पाप होता है| इस संसार मे िजतने भी शरीरधारी है, उन सबमे केवल मनुषय ही सबसे अिधक बुिदमान पाणी है| वह इस जनम मे और भी अिधक पुणय कमर कर सकता है| 12 of 15 Contd…
  13. 13. उसके पास बुिद है, ज्ञान है और इसके बावजूद भी वह मानव शरीर पाकर मोह-माया और वासना के दलदल मे फं स जाता है| इससे छुटकारा पाना असंभव हो जाता है| उसका मन रात-िदन वासना और सवाथर मे िलप रहता है| धन-सम्पित पाने के िलए वह कैसे-कैसे कायर नही करता है| मनुषय को इस दलदल से यिद कोई मुिक िदला सकता है, तो वह है गुर... केवल सदगुर| लेिकन आज के समय मे सच्चा गुर कहा िमलता है| सच्चे इंसान ही बड़ी मुिश्कल से िमलते है| िफर सच्चे गुर का िमलना तो और भी अिधक किठिन है|“ "सच्चे गुर िक पहचान कया है साई बाबा?" एक विक ने पूछा| 13 of 15 Contd…
  14. 14. "सच्चा गुर वही है, जो िशषय को अचछाई-बुराई का भेद बता सके| उिचत-अनुिचत का अंतर बता सके| आतमपकाश, आतमज्ञान दे सके| िजसके मन मे रतीभर भी सवाथर की भावना न हो, जो िशषय को अपना ही अंश मानता हो| वही सच्चा सदगुर है|" साई बाबा ने बताया और िफर अचानक उनहे जैसे कुछ याद आया, तो वह बोले - " आज तातया नही आया कया?“ "बाबा, मै आपको बताना ही भूल गया| तातया को आज बहत तेज बुखार आया है|" 14 of 15 Contd…
  15. 15. For more Spiritual Content Kindly visit: http://spiritualworld.co.in 15 of 15 End "तो आओ चलो, तातया को देख आये|" साई बाबा ने अपने आसन से उठिते हए कहा| साथ ही अपनी धूनी मे से चुटकी भभूित अपने िसर के दुपटे मे बांधकर चल पड़े|

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