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Pituitary adenoma

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This a miraculous news of the day. Rekha Jain of Pali, India phoned me and narrated the whole story. She is 46 and suffers from Pituitary Adenoma with hyperprolactinemia (Brain Tumor) since 25 years.
On my recommendation she started using Flaxseed about two years back. After just six months her brain tumor was vanished completely which was confirmed by MRI scan. Even many doctors admitted that it is a miracle.

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Pituitary adenoma

  1. 1. 1 | P a g e िपट्यूटरी एडीनोमा या िपट्यूटरी ग्रंिथ अबुर्द िपट्यूटरी के अिधकांश अबुर्द िबनाइन या सुदम होते हैं जो िपट्यूटरी ग्रंिथ क� कोिशकाओंसे उत्पन्न होते हैं और धीरे धीरे बढ़ते हैं। िपट्यूटरी ग्रंिथ मिस्तष्क के आधार पर आंखों के ठीक पीछे िस्थत होती है। इसे मास्टर हाम�न ग्लैंड भी कहते हैं क्योंिक यह शरीर के अन्य सभी हाम�न्स के �ाव को िनयंित्रत करती है। िपट्यूटरी एडीनोमा - कायर्प्रणाली िपट्यूटरी ग्रंिथ में कई तरह क� कोिशकाएं होती हैं जो िविभन्न हाम�न्स बना कर र� प्रवाह में छोड़ती हैं। ये शरीर के अन्य हाम�न्स क� गितिविध को िनयंित्रत करते हैं। िपट्यूटरी एडीनोमा इन िविश� कोिशकाओंमें से िकसी एक कोिशका से उत्पन्न होता है। यिद अबुर्द कोिशका एक या एक से अिधक हाम�न्स का अनावश्यक �वण करती है तो इसे कायार्त्मक अबुर्द या फंक्शनल एडीनोमा कहते हैं। इसके उदाहरण िनम्न िलिखत हैं।  प्रोलेिक्टनोमा – इस एडीनोमा में प्रोलेिक्टन हाम�न का �वण बढ़ जाता है। प्रोलेिक्टन हाम�न स्तन में दुग्ध �ाव को िनयंित्रत करते हैं।  एक्रोमेगेली (युवाओंमें) जायगेंिटस्म (बच्चों मे) - इस एडीनोमा में ग्रोथ हाम�न का �वण बढ़ जाता है।  किशंग्स िडजीज - इस िवकार में कोिटर्जोल हाम�न का �वण बढ़ जाता है। जो िपट्यूटरी एडीनोमा कोई सिक्रय हाम�न नहीं बनाते हैं, उन्हें नॉनफंक्शिनंग एडीनोमा कहते हैं। िपट्यूटरी एडीनोमा – आघटन (Incidence) िपट्यूटरी एडीनोमा बह�त सामान्य रोग है। अमूमन हर पांच में से एक व्यि� में कोई सू�म सा एडीनोमा देखने को िमल जाता है। हालांिक ये कभी बढ़ते नहीं हैं और कोई तकलीफ भी नहीं देते। बस यिद मिस्तष्क क� िकसी अन्य कारण से एम.आर.आई. होती है तब इसका पता चलता है। िपट्यूटरी एडीनोमा – वग�करण (Classification) िपट्यूटरी एडीनोमा को उनके आमाप, आक्रामकता और हाम�न सिक्रयता के आधार पर वग�कृत िकया जाता है।
  2. 2. 2 | P a g e  आमाप - माइक्रोएडीनोमा - 10 िमिल मीटर से छोटे अबुर्द और मेक्रोएडीनोमा - 10 िमिल मीटर से बड़े अबुर्द  आक्रामकता – ज्यादातर िपट्यूटरी एडीनोमा सुदम (िबनाइन) होते हैं और धीरे बढ़ते हैं। कुछ ही एडीनोमा दुदर्म (मेिलगनेंट) होते हैं जो तेजी से बढ़ते हैं और अन्य अंगों में स्थलांित्रत (मेटास्टेिसस) हो जाते हैं।  हाम�न सिक्रय – जो एडीनोमा हाम�न्स का अनावश्यक �वण करते हैं, उन्हें कायार्त्मक अबुर्द या फंक्शनल एडीनोमा कहते हैं। लेिकन जो एडीनोमा कोई सिक्रय हाम�न नहीं बनाते हैं, उन्हें नॉनफंक्शिनंग एडीनोमा कहते हैं। िपट्यूटरी एडीनोमा – कारण अिधकांश िपट्यूटरी एडीनोमा आनुवंिशक नहीं होते और स्वतः ही उत्पन्न होते हैं। परंतु कुछ प�रवारों में आनुवंिशक िपट्यूटरी एडीनोमा के रोगी भी देखे गए हैं। खासतौर पर कुछ प�रवारों के बच्चों और िकशोरों में आनुवंिशक जाइगेंिटज्म और एक्रोमेगेली के कई मामले सामने आए हैं। मल्टीपल एंडोक्रोइन िनओप्लेिजया टाइप-1 ( MEN 1) एक िवरला रोग है िजसमें िपट्यूटरी, पेनिक्रयास और पेराथायरॉयड के अबुर्द एक साथ देखने को िमलते हैं। MEN 1 के 25 प्रितशत रोिगयों में आमतौर पर िपट्यूटरी एडीनोमा िमल ही जाता है। िपट्यूटरी एडीनोमा – ल�ण िपट्यूटरी एडीनोमा के ल�ण इस बात पर िनभर्र करते हैं िक वह िकसी अमुक हाम�न का �वण कर रहा है या िचिकत्सक�य �ि� से अकमर्ण्य है।  हाम�न बनाने वाले िपट्यूटरी एडीनोमा अमुक हाम�न का अत्यिधक �वण करते हैं और र� प्रवाह में छोड़ते हैं। रोगी को उस हाम�न के प्रभाव से ल�ण पैदा होते हैं।  िचिकत्सक�य �ि� से अकमर्ण्य िपट्यूटरी एडीनोमा में तभी ल�ण उभरते हैं जब वह अपने बढ़ते आकार के कारण आसपास क� संरचनाओंपर दबाव डालता है। o बड़े िपट्यूटरी एडीनोमा ऑिप्टक िचयाज्म (मिस्तष्क का वह स्थान जहाँ दोनों तरफ क� ऑिप्टक नवर् क्रोस करती है) पर दबाव डालते हैं िजससे रोगी अंधा हो सकता है। o बड़े िपट्यूटरी एडीनोमा िपट्यूटरी ग्रंिथ पर भी दबाव डाल सकती है, िजससे िपट्यूटरी ग्रंिथ में अकमर्ण्यता या िपट्यूटरी फेल्यर हो सकता है। इसीिलए िपट्यूटरी एडीनोमा के रोगी के िपट्यूटरी फंक्शन क� िवस्तार से जांच क� जानी चािहये।
  3. 3. 3 | P a g e हाम�न बनाने वाले िपट्यूटरी एडीनोमा भी आकार में बड़े हो सकते हैं और उपरो� ल�ण पैदा कर सकते हैं। हाम�न के �वण से संबंिधत ल�ण  प्रोलेिक्टन – सीक्र�िटंग िपट्यूटरी एडीनोमा (प्रोलेिक्टनोमा) – यह िपट्यूटरी एडीनोमा अत्यिधक प्रोलेिक्टन हाम�न बनाता है। इसके कारण ि�यों में माहवारी नहीं होना और स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ जाना आिद ल�ण होते हैं। पु�षों में प्रोलेिक्टन हाम�न टेस्टोिस्टरोन के �वण को कम कर देता है, िजससे उन्हें लैंिगक संसगर् में �िच कम हो जाती है।  ग्रोथ हाम�न – सीक्र�िटंग एडीनोमा – ग्रोथ हाम�न ( GH) का अत्यिधक �वण होने के कारण युवाओंमें एक्रोमेगेली और बच्चों में जायगेंिटज्म हो जाता है। इसमें हाथ पैर बड़े और फूल जाते हैं और शरीर में कई प�रवतर्न होते हैं। रोगी को उच्च र�चाप, डायिबटीज और �दय रोग हो सकते हैं, उसका जीवनकाल भी छोटा हो जाता है।  ACTH सीक्र�िटंग - िपट्यूटरी एडीनोमा – ACTH का �वण बढ़ना किशंग्स िडजीज का कारक बनता है। इस िवकार के प्रमुख ल�ण हैं अकारण वजन बढ़ना, जरा सी चोट से त्वचा में नील या खंरोच पड़ जाना, मांसपेिशयों में कमजोरी आ जाना।  TSH सीक्र�िटंग - िपट्यूटरी एडीनोमा – ( Thyrotropinoma) TSH हाम�न का �वण बढ़ने से हाइपरथायरॉयिडज्म हो जाता है। यह बह�त िवरला अबुर्द है। बड़े िपट्यूटरी एडीनोमा (Macroadenoma) से संबंिधत ल�ण  �ि�दोश या अँधापन - ऑिप्टक िचयाज्म पर दबाव पड़ने से रोगी अंधा हो सकता है।  बाहर के तरफ क� �ि� चली जाना ( Bitemporal Hemianopsia)।  यिद यह �ि� दोष बह�त गंभीर हो तो रोगी को िसफर् अपने सामने क� चीजें ही िदखाई दोती है। लेिकन कई बार जब तक �ि� दोष बह�त बढ़ नहीं जाता तब तक रोिगयों को इसका आभास ही नहीं हो पाता है।
  4. 4. 4 | P a g e अन्य �ि� िवकार –  �ि� क� ती�णता में कमी या धुंधलापन ( Loss of Visual acuity) खासतौर पर यिद एडीनोमा आगे क� तरफ बढ़ता है और ऑिप्टक नवर् पर दबाव डालता है।  रंग उजले और अस्प� िदखाई नहीं देते (Color Blindness)।  िपट्यूटरी अकमर्ण्यता - के ल�ण नीचे िदए जा रहे हैं। िपट्यूटरी अकमर्ण्यता के ल�ण बड़े िपट्यूटरी एडीनोमा िपट्यूटरी ग्रंिथ पर भी दबाव डाल सकते हैं, िजससे िपट्यूटरी ग्रंिथ अकमर्ण्यता या िपट्यूटरी फेल्यर हो सकता है। इसके ल�ण प्रभािवत हाम�न पर िनभर्र करते हैं।  सेक्स हाम�न्स में कमी – ल्युिटनाइिजंज हाम�न (LH) और फॉलीकल िस्टमुलेिटंग हाम�न (FSH) o इससे पु�षों में टेस्टोिस्टरोन के �वण को कम हो जाता है, िजससे उन्हें नपुंसकता और सहवार में अ�िच हो जाती है। o कुछ रोिगयों में दाढ़ी मूँछ और शरीर पर बाल कम हो जाते हैं। o ि�यों में बांझपन हो सकता है।  TSH हाम�न का �वण कम होने से हाइपोथायरॉयिडज्म होता है, िजसके ल�ण हैं भूख कम लगना, वजन बढ़ना, थकान, मानिसक कमजोरी आिद।  ACTH बनना कम जाए तो कोिटर्जोल हाम�न का �वण कम हो जाता है और एडरीनल इनसिफशयेंसी के ल�ण जैसे थकान, र�चाप कम होना, इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन आिद देखने को िमलते हैं। गंभीर अवस्था में मृत्यु भी हो सकती है।  ग्रोथ हाम�न (GH) का �वण कम होना ग्रोथ हाम�न इनसिफशयेंसी का कारक बनता है। o बच्चों का शारी�रक िवकास िशिथल हो जाता है, फलस्व�प बच्चे बौने रह जाते हैं और यौन प�रपक्वता देर से ( Delayed Puberty) होती है। o बड़े लोगों में हल्के ल�ण होते हैं जैसे थकान और कमजोर मांसपेिशयां।  प्रोलेिक्टन के िनमार्ण में कमी असामान्य ल�ण है और गंभीर अवस्था में ही देखने को िमलते हैं।  बड़े िपट्यूटरी ट्यूमर प्रोलेिक्टन का स्तर बढ़ा भी सकते हैं, इसका कारण िपट्यूटरी स्टॉक (िपट्यूटरी ग्लैंड और मिस्तष्क के बीच क� टहनी) पर दबाव पड़ना माना गया है। इसको स्टॉक इफेक्ट कहते हैं।
  5. 5. 5 | P a g e o िप्रमेनोपॉजल ि�यों में माहवारी नहीं आना या ठीक से नहीं आना और स्तनों में दूध का उत्पादन बढ़ जाना आिद ल�ण होते हैं। o िसरददर् िपट्यूटरी ऐपोप्लेक्सी िपट्यूटरी एडीनोमा में अचानक र��ाव हो सकता है और उसका आकार बढ़ सकता है । कई बार तो यह उसक� र�संचार �मता से अिधक बढ़ जाता है और यह मृत ऊतकों क� एक गांठ का �प ले लेता है। इस अवस्था को िपट्यूटरी ऐपोप्लेक्सी कहते हैं। इसमें रोगी को अचानक तेज िसरददर् होता है और वह अंधा हो सकता है। आपातकालीन शल्य िचिकत्सा ज�री उपचार है। िपट्यूटरी ऐपोप्लेक्सी में िपट्यूटरी इनसिफशयेंसी भी हो सकती है लेिकन इसके ल�ण कई िदन या हफ्ते बाद उत्पन्न होते हैं। िपट्यूटरी एडीनोमा – िनदान िपट्यूटरी एडीनोमा का शु�आती िनदान ल�ण, िचिकत्सक�य इितहास और परी�ण के आधार पर िकया जाता है। रोगी के ल�णों के बारे में िचिकत्सक बड़े इित्मनान से पूछताछ करता है तािक वह जान सके िक ट्यूमर हाम�न्स का �वण अिधक कर रहा है या रोगी को िपट्यूटरी इनसिफशयेंसी ह�ई है। िपट्यूटरी एडीनोमा के िनदान हेतु आमतौर पर हाम�न्स क� जांच और इमेिजंग स्के न िकए जाते हैं।
  6. 6. 6 | P a g e िपट्यूटरी हाम�न फं क्शन टेिस्टंग यह बह�त ज�री जांच है। हाम�न्स क� जांच से फंक्शनल एडीनोमा का िनदान या सत्यापन हो जाता है। कुछ फंक्शनल ट्यूमर जैसे प्रोलेिक्टनोमा का उपचार िबना शल्य के िकया जा सकता है, इसिलए यह बह�त ज�री है िक शल्य करने के पहले हाम�न्स क� िवस्तृत जांच करली जाए। िपट्यूटरी एडीनोमा – छायांकन जांच (Imaging) िपट्यूटरी एडीनोमा के िनदान के िलए एम.आर.आई. बह�त अहम जांच है, इसके द्वारा 4 िमिलमीटर तक के अबुर्द आसानी से पहचाने जा सकते हैं। कुछ मरीजों में शि�शाली 3T (Tesla) एम.आर.आई. स्के न िकया जाता है। यह छोटे एडीनोमा को भी पहचान लेता है। कभी सी.टी. स्के न भी िकया जा सकता है। अंतरात्मक िनदान (Diffencial Diagnosis) िपट्यूटरी एडीनोमा जैसे ल�ण कुछ अन्य ट्यूमसर् में भी देखे जा सकते हैं। िचिकत्सक अपनी सूझ-बूझ और िविभन्न परी�णों के नतीजों से सही िनदान कर लेता है। कन्फ्यूजन पैदा करने वाले िवकार िनम्न िलिखत हैं।  क्रेिनयोफे�रंिजयोमा  रेथके ज क्लेफ्ट िसस्ट  मेिनंिजयोमा  अरेकनॉयड िसस्ट  ग्रेन्युलोमेटस िडजीज  ग्लायोमा ऑफ सुप्रासेलर रीजन  मेटास्टेिटक ट्यूमर  कोड�मा िपट्यूटरी एडीनोमा – उपचार (Treatment) िपट्यूटरी एडीनोमा का उपचार कई पहलुओंपर िनभर्र करता है जैसे  क्या एडीनोमा िकसी हाम�न का �वण कर रहा है?  एडीनोमा का आमाप  एडीनोमा ने आसपास क� िकन संरचनाओंको दबा कर रखा है?  रोगी क� उम्र और स्वास्थ्य
  7. 7. 7 | P a g e िपट्यूटरी एडीनोमा – िचिकत्सक�य उपचार यिद एडीनोमा हाम�न बना रहा है तो अमूमन दवाओंसे राहत िमल सकती है। इस रोग के िवशेष�, िजन्हें हम न्यूरो- एंडोक्राइनोलोिजस्ट कहते हैं, रोगी को सही परामशर् देते हैं। दवाइयां कुछ तरह के िपट्यूटरी एडीनोमाज में काफ� मददगार सािबत ह�ई हैं, जैसे प्रोलेिक्टनोमा इसके उपचार हेतु डोपामीन एंटागोिनस्ट जैसे ब्रोमोिक्रप्टीन और ऐबरगोलीन प्रभावशाली पाई गई हैं। ये प्रोलेिक्टन के �वण को कम करती हैं और अबुर्द को छोटा कर सकती हैं। ऐबरगोलीन का असर देर तक रहता है। यिद ये दवाइयां अबुर्द को छोटा ना भी कर सकें तो कम से कम उसे बढ़ने नहीं देती। और यिद ये फायदा करती हैं तो इन्हें आजीवन िदया जाता है। ग्रोथ हाम�न सीक्र�िटंग ट्यूमसर् ऑिट्रयोटाइड (सैंडोस्टेिटन) प्राकृितक सोमेटोस्टेिटन का मानव-िनिमर्त प्रित�प है। सोमेटोस्टेिटन ग्रोथ हाम�न (सोमेटोट्रोिफन) को अव�द्ध करता है और दो ितहाई मरीजों में इंसुिलन-लाइक ग्रोथ फेक्टर-1 को सामान्य रखता है। इसे शु� में इंजेक्शन द्वारा िदन में तीन बार िदया जाता है। लंबी अविध तक असर करने वाले इंजेक्शन भी उपलब्ध हैं। एक नई दवा लेन�रयोटाइड (सोमेटुलीन) का इंजेक्शन महीने में एक बार िदया जाता है। डोपामीन एंटागोिनस्ट जैसे ब्रोमोिक्रप्टीन और ऐबरगोलीन भी 20 प्रितशत रोिगयों में ग्रोथ हाम�न का स्तर कम करते हैं। पेग्वीसोमेंट (सोमावटर्) नई दवा है जो अन्य कोिशकाओंमें ग्रोथ हाम�न को अव�द्ध करती हैं, कम करती हैं, लेिकन िपट्यूटरी ग्लैंड द्वारा �ािवत ग्रोथ हाम�न को अव�द्ध नहीं करती हैं और ट्यूमर को भी छोटा नहीं करती हैं। यह लीवर को खराब करती है और ब्लड शुगर कम कर सकती है। इसका इंजेक्शन रोजाना िदया जाता हैं। ACTH सीक्र�िटंग ट्यूमसर् ACTH सीक्र�िटंग ट्यूमसर् के उपचार में यिद शल्य िक्रया और रेिडयोथेरेपी काम नहीं करे तो दवाइयों क� मदद ली जाती है। 50 प्रितशत रोिगयों में साइप्रोहेप्टाडीन ACTH का �वण कम करती है। लेिकन कुछ अन्य दवाइयां जैसे क�टोकोनाजोल, एमाइनोग्लूटेथेमाइड, इटोमाइडेट, मेटाइरापोन, माइफिप्रस्टोन और माइटोटेन भी प्रयोग में ली जाती हैं।
  8. 8. 8 | P a g e TSH सीक्र�िटंग ट्यूमसर् इनमें ऑिक्ट्रयोटाइड और लेन�रयोटाइड दी जाती हैं, जो TSH के �वण को अव�द्ध करती हैं। ब्रोमोिक्रप्टीन और ऐबरगोलीन भी दी जा सकती हैं। किशंग्स िडजीज और एक्रोमेगेली यह बह�त ज�री है िक िपट्यूटरी फेल्यर के ल�णों पर पूरी नजर रखी जाए और समुिचत उपचार िदया जाए, खासतौर पर शल्यिक्रया के पहले। िपट्यूटरी एडीनोमा – शल्य िचिकत्सा यिद िपट्यूटरी एडीनोमा के उपचार हेतु शल्य िचिकत्सा करनी है तो नाक के अंदर से एंडोस्कोप डाल कर शल्य िकया जाता है। यह बह�त आधुिनक और आसान उपचार है, जो कुछ बड़े शल्य कैं द्रों में ही िकया जाता है। इस शल्य िचिकत्सा में रोगी को तकलीफ कम होती है, िडस्चाजर् जल्दी िमल जाता है और जिटलताएं भी कम होती हैं। बह�त बड़े ट्यूमर िनकालने के िलए कई बार खोपड़ी में िछद्र करना पड़ता है। हमारे शल्य िचिकत्सक िमिनमली इनवेिजव क�-होल क्रेिनयोटोमी द्वारा ट्यूमर िनकालने में बड़े िनपुण होते हैं। िपट्यूटरी एडीनोमा – रेिडयो थेरेपी कई बार शल्य द्वारा ट्यूमर को िनकालना संभव नहीं होता है और दवाइयां भी काम नहीं करती है। ऐसी अवस्था में ट्यूमर को खत्म करने के िलए रेिडयो थेरेपी का सहारा िलया जाता है। इस हेतु स्टी�रयोटेिक्टक रेिडयोसजर्री तकनीक काम में ली जाती है। इसमें तेज रेिडयो तरंगों को ट्यूमर पर कैं िद्रत करके जला या जाता है। ऐसा कहते हैं िक यह रेिडयोथेरेपी आसपास क� संरचनाओंको नुकसान नहीं पह�ँचाती है। िपट्यूटरी फेल्यर इसका एक साइड इफेक्ट है, काफ� देर से होता है। ऐसी िस्थित में हाम�न उपचार िदए जाते हैं। डॉ. ओ.पी.वमार् 7-बी-43, महावीर नगर तृतीय, कोटा राज. http://flaxindia.blogspot.com मोबाइल 9460816360 This a miraculous news of the day. Rekha Jain of Pali, India phoned me and narrated the whole story. She is 46 and suffers from Pituitary Adenoma with hyperprolactinemia (Brain Tumor) since 25 years. On my recommendation she started using Flaxseed about two years back. After just six months her brain tumor was vanished completely which was confirmed by MRI scan. Even many doctors admitted that it is a miracle.

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