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Ancient india (प्राचीन भारत)

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Ancient india (प्राचीन भारत)

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Ancient india (प्राचीन भारत)

  1. 1. www.rrbportal.com RRB PORTAL Online Coaching For RRB Exam Subject: सामान्य ज्ञान Chapter: Ancient India (प्राचीन भारत)
  2. 2. www.rrbportal.com पुराऐततहाससक संस्कृ ततयां असभलेखः अभिलेख सर्वाधिक महत्र्पूर्ा सवक्ष्य मवने जवते हैं। सम्रवट अशोक के अभिलेख सर्वाधिक प्रवचीन मवने जवते हैं। अशोक के अधिकवांश अभिलेख ब्रवह्मी भलपप में, पवककस्तवन तथव अफगवननस्तवन से प्रवप्त अभिलेख अरमवइक एर्ां युनवनी भलपप में है। मवस्की, गुजारव तथव पवनगुडइयव के अभिलेख में अशोक के नवम कव उल्लेख है। अभिलेखों में अशोक को पप्रयदशी तथव देर्तवओां कव पप्रय कहव गयव है। अशोक के सिी अभिलेखों कव पर्षय प्रशवसननक है परांतु रूम्नदेई अभिलेख कव पर्षय आधथाक है। गुप्त शवसकों कव इनतहवस अधिकतर उनके अभिलेखों के आिवर पर भलखव गयव है।
  3. 3. www.rrbportal.com प्रशस्स्त अभिलेखों में प्रभसद्ि है, रूद्रदवमन कव धगरनवर अभिलेख, खवरर्ेल कव हवथी गुफव अभिलेख, समुद्रगुप्त कव प्रयवग प्रशस्स्त, सवतर्वहन रवजव पुलुमवर्ी कव नवभसक गुफवलेख आदद। यर्न रवजदूत हेभलयोडोरस कव बेसनगर से प्रवप्त गरूड़ स्तांि अभिलेख से द्पर्तीय सदी ई. पूर्ा के मध्य िवरत में िवगर्त िमा के मौजूद होने कव प्रमवर् भमलतव है। मध्य प्रदेश के एरर् से प्रवप्त अभिलेख से गुप्तकवल में सती प्रथव की जवनकवरी प्रवप्त होती है। गुप्तकवलीन उद्यवधगरर स्स्थत र्रवह की मूनता पर हूर् शवसक तोरमवर् कव लेख अांककत है।
  4. 4. www.rrbportal.com विदेशी असभलेख : पर्देशी अभिलेखों में सबसे पुरवनव अभिलेख 1400 ई.पू. कव है तथव एभशयव मवइनर में ‘बोगजकोई’ से प्रवप्त हुआ है। इसमें र्रूर्, भमत्रव, इन्द्द्र तथव नवसत्य देर्तवओां कव नवमोल्लेख है। पभसापोभलस तथव बेदहस्तून अभिलेखों से ज्ञवत हुआ है कक ईरवनी सम्रवट द्र्वरव प्रथम ने 516 ई.पू. में भसन्द्िू नदी घवटी के क्षेत्रव पर अधिकवर कर भलयव थव। भमस्र में तेलुर्ल अमनों में भमट्टी की तस्ततयवां भमली हैं स्जन पर बेबीलोननयव के कु छ शवसकों के नवम उत्कीर्ा हैं जो ईरवनी एर्ां िवरत के आयाशवसकों के नवम जैसे हैं।
  5. 5. www.rrbportal.com मूततिकलाः मौयाकवल में ननभमात पर्भिन्द्न मूनतायवां जैसे ग्र्वभलयर की मणर्िद्र की मूनता, िौली कव हवथी, परखम कव यक्ष तथव दीदवरगांज की यक्षर्ी आदद प्रभसद्ि कलवत्मक पुरवतवस्त्र्क सवक्ष्य है। गांिवर कलव तथव मथुरव कलव के कननष्क की भसर पर्हीन मूनता से तत्कवलीन र्ò पर्न्द्यवस की जवनकवरी प्रवप्त होती है।
  6. 6. www.rrbportal.com मुद्रायें : सन ् 206 ई. से 300 ई. तक कव िवरतीय इनतहवस कव ज्ञवन मुतयतयव मुद्रवओां पर आिवररत है प्रवचीन िवरत में सोनव, चवांदी, तवांबव, सीसव तथव पोटीन के बने भसक्के प्रचभलत थे। यद्यपप िवरत में भसक्कों की प्रवचीनतव कव स्तर आठर्ीां शती ई.पू. तक है परन्द्तु ननयभमत भसक्के छठी सदी ई.पू. से ही प्रचलन में आये। प्रवचीनतम भसक्को को ‘आहत भसक्के ’ कहव जवतव है। सवदहत्य में इन्द्हें ‘कषवापर्’ कहव गयव है। ये अधिकवांशतः चवांदी के हैं स्जन पर ठप्पव लगवकर पर्पर्ि आकृ नतयवां उके री गई हैं। दहन्द्द-बैस्क्टरीयवई शवसकों ने सर्ाप्रथम भसक्कों पर लेख अांककत करर्वयव। लेखों से सांबांधित रवजव के पर्षय में महत्र्पूर्ा सूचनव प्रवप्त होती है।
  7. 7. www.rrbportal.com सबसे अधिक तवांबे, चवांदी र् सोने के भसक्के मोयोत्तर युग के है। मुद्रवओां की सहवयतव से सांबांधित कवल के िवभमाक पर्श्र्वस, कलव, शवसन पद्िनत तथव पर्जय अभियवन कव ज्ञवन प्रवप्त होतव है। कननष्क की मुद्रवओां से उसके बौद्ि िमा के अनुयवयी होने कव पतव चलतव है। शक-पहलर् युग की मुद्रवओां से उनकी शवसन पद्िनत कव ज्ञवन होतव है। स्कन्द्द्गुप्त की मुद्रवओां में सस्म्मधित स्र्र्ा भमलतव है स्जससे तवत्कवभलक आांतररक अशवांनत तथव कमजोर आधथाक स्स्थनत कव ज्ञवन होतव है। कु षवर् कवल की स्र्र्ा मुद्रवयें सर्वाधिक शुद्ि स्र्र्ा मुद्रवयें थीां। गुप्तकवल में सर्वाधिक सोन के भसक्के जवरी ककये गये।
  8. 8. www.rrbportal.com स्मारक एिं भिनः तक्षभशलव से प्रवप्त स्मवरकों से कु षवर् र्ांश के शवसकों तथव गांिवरकवलीन कलव की जवनकवरी प्रवप्त होती है। िवरतीय इनतहवस से सांबांधित कु छ पर्देशी स्मवरक िी प्रकवश में आये हैं। जैसे- कां बोडडयव के अांकोरर्वट कव मस्न्द्दर, जवर्व कव बोरोबुदूर मस्न्द्दर आदद। भूसमदान पत्ाः ये प्रवयः तवांबे की चवदरों पर उत्कीर्ा हैं तथव शवसकों अथर्व सवमांतों द्र्वरव ददये दवन अथर्व ननदेश के लेखपत्रव है। दक्षक्षर् िवरत के चोल, चवलुक्य, रवष्रकू ट, पवण्ड्य तथव पल्लर् र्ांश कव इनतहवस भलखने में ये उपयोगी हैं।
  9. 9. www.rrbportal.com चचत्ाकलाः धचत्रवकलव तवत्कवलीन समवज की उन्द्ननत तथव अर्ननत के द्योतक होते हैं। साहहत्ययक स्त्ोत िैहदक साहहययः र्ैददक सवदहत्य के अन्द्तगात र्ेद, र्ेदवांग, उपननषद्, पुरवर्, स्मृनत, िमाशवस्त्रव आदद आते हैं। अथर्ार्ेद में अांग एर्ां मगि महवजनपद कव उल्लेख है। आयों द्र्वरव अनवयों की सांस्कृ नतयों को अपनवने कव िी उल्लेख है। मत्स्य पुरवर् में सवतर्वहन र्ांश के पर्षय में जवनकवरी भमलती है तथव मत्स्य पुरवर् सर्वाधिक प्रवचीन एर्ां प्रवमवणर्क पुरवर् है। पर्ष्र्ु पुरवर् से मौया र्ांश एर्ां गुप्त र्ांश की जवनकवरी प्रवप्त होती है।
  10. 10. www.rrbportal.com र्वयु पुरवर् से शुांग एर्ां गुप्त र्शां की पर्शेष जवनकवरी भमलती है। सांस्कृ त में भलणखत बौद्ि ग्रन्द्थ महवर्स्तु तथव लभलत पर्स्तवर में महवत्मव बुद्ि के जीर्न चररत कव उल्लेख है। द्स््यवर्दवन में परर्ती मौया शवसकों एर्ां शांगु रवजव पुष्यभमत्रव शांगु कव उल्लेख भमलतव है। पररभशष्ट पर्ान नवमक जैन ग्रांथ से ज्ञवत होतव है कक मौया शवसक चन्द्द्रगुप्त अपने जीर्न के अांनतम कवल में जैन िमा को अपनव भलयव थव एर्ां िर्र्बेलगोलव में रहकर उपर्वस द्र्वरव प्रवर् त्यवग ददयव थव। जैन ग्रांथ िगर्ती सूत्रव से तत्कवलीन 16 महवजनपदों के अस्स्तत्र् कव पतव चलतव है। िद्रबवहुचररत ् से चांद्रगुप्त मौया के रवज्य कवल की घटनवओां पर कु छ प्रकवश पड़तव है।आरांभिक सैंिर् सभ्यतव के सवक्ष्य
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